नमाज़ के लिए आदिवासियों की जमीन पर कर रहे थे कब्ज़ा, तीर धनुष से आदिवासियों ने बचाई जमीन

बिहार के किशनगंज से एक बड़ी खबर आ रही है, मीडिया इस खबर पर रुदाली करे इस से पहले आपको इस खबर की असल सच्चाई को जानना जरुरी है

किशनगंज में आदिवासियों और नमाजियों के बीच संघर्ष हुआ है, पहले आपको बता दें की किशनगंज में नमाजियों की जनसँख्या अब 70% पार हो चुकी है, और यहाँ पर AIMIM भी काफी सक्रीय हो चुकी है

यहाँ हिन्दू बचे कुचे ही है, और जो बचे है वो किस प्रकार से जीवन व्यतीत करते होंगे आप इसे आसानी से कैराना जैसे उदाहरण से समझ ही सकते है

किशनगंज के ठाकुरगंज थाना छेत्र के अंतर्गत आने वाले धुलाबाड़ी चाय बागान में अदिवादियों की जमीन पर नमाजियों ने कब्जे की कोशिश की, कब्ज़ा नमाज़ पढने के मकसद से हो रहा था

आदिवासियों ने इस बात का विरोध किया, क्यूंकि वो अच्छे से जानते थे की एक बार नमाज़ पढने की ढील दे दी तो उनकी जमीन पर फिर हमेशा के लिए कब्ज़ा हो जायेगा

आदिवासियों ने नमाज़ के लिए जमीन देने से इंकार किया तो विवाद बढ़ने लगा, नमाजियों ने संख्या बल दिखाने की कोशिश करी तो आदिवासियों ने फिर अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ने का मन बना लिया और फिर आदिवासियों ने अपनी जमीन बचाने के लिए तीर धनुष का इस्तेमाल किया

https://twitter.com/squintneon/status/1136320760388116481

इस संघर्ष में आदिवासियों ने कई नमाजियों को घायल कर दिया, कईयों को अस्पताल में जमा करवाया गया है, हालाँकि किसी की इस घटना में जान नहीं गयी है

पर आदिवासियों ने अपनी जमीन को लुटने नहीं दिया और संघर्ष की कीमत पर अपनी जमीन को तीर धनुष के इस्तेमाल से बचाया, इलाके में तनाव है और भारी मात्र में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है, ये संघर्ष इसलिए हुआ क्यूंकि आदिवासियों को नमाजियों ने संख्या बल से डराने की कोशिश की और उनकी जमीन को नमाज़ के लिए कब्जाने का प्रयास किया