भारत को मजबूत करना है तो सभी को मानना पड़ेगा हिंदी को अपनी भाषा, जो हिंदी का विरोध करे वो भारतीय नहीं : भीमराव आंबेडकर

देश में कुकुरमुत्तों का एक बड़ा जमात है जो की हिंदी का तो बहुत विरोध करता है, पर इस जमात को उर्दू अपने बाप जैसी लगती है, ये पूरी जमात अंग्रेजी की तो नाजायज औलाद ही है

ये जमात हिंदी का विरोध करने के लिए काफी नफरत फ़ैलाने का काम करती है, हिंदी को विदेशी भाषा बताते है, हिंदी का विरोध करने के लिए हिंसा की धमकी भी देते है

ये जमात कहती है की हिंदी से हमारी संस्कृति को खतरा है, इस पूरी जमात को उर्दू से अपनी संस्कृति को खतरा नहीं लगता, अंग्रेजी से अपनी संस्कृति को खतरा नहीं लगता, पूरी नफरत सिर्फ हिंदी के लिए ही है, ऐसी पूरी जमात के बारे में भारत रत्न भीमराव आंबेडकर ने क्या कहा था ये आपको अच्छे से जान लेना चाहिए

https://twitter.com/TrueIndologyliv/status/1135450332467609600

आंबेडकर ने कहा था की – हिंदी ही पुरे भारत की राष्ट्रभाषा बनाई जानी चाहिए, भारत को मजबूत बनाना है तो समाज को एकजुट करने वाली कोई भाषा चाहिए, और भारत में सबसे बड़ी भाषा हिंदी है

आंबेडकर ने कहा था की – हमे पुरे भारत में एक कॉमन कल्चर बनाना चाहिए, जिस से भारतीय एक दुसरे से अच्छे से जुड़ सके इसी कारण हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाना चाहिए, आंबेडकर ने ये भी कहा था की – जो हिंदी का विरोध करते है वो भारतीय कहलाने के लायक नहीं है

आपकी जानकारी के लिए बता दें की स्वयं आंबेडकर हिंदी भाषी नहीं थे, वो मराठी थे, पर फिर भी उन्होंने राष्ट्र में एक कॉमन कल्चर, राष्ट्र को एकजुट करने के लिए हिंदी का समर्थन किया था, और ये पूरी जमात जो आज हिंदी का विरोध करती है ये आंबेडकर के नाम पर भी राजनितिक दूकान दशको से चला रही है