हराम है हिन्दुओ के सारे त्यौहार, हिन्दुओ को बधाई देना भी हराम है : फैज़ सयेद, इस्लामिक मजहब गुरु

इस देश में जो सेकुलरिज्म है वो सिर्फ एकतरफा है, आप टोपी पहन सकते है पर दूसरी तरफ आपके तिलक को वो नहीं लगा सकते, ये एक कड़वा सच है, सेकुलरिज्म सिर्फ आपकी तरफ से ही है

मजहबी उन्मादियों के बड़े बड़े विद्वान जो की मजहब को पुरे अच्छे से जानते है वो खुलकर दुसरे धर्मो को गाली देते है, और इसके एक नहीं हजारों उदाहरण है

जाकिर नाइक की तरह ही एक और इस्लामिक मजहब गुरु भारत में सक्रीय है, इसका नाम है फैज़ सयेद, ये भी इस्लाम पर कार्यक्रम करता है

इसे मजहबी समाज में काफी उच्च दर्जा प्राप्त है और ये खुलकर हिन्दू त्योहारों को गालियाँ देता है, हिन्दू त्योहारों को हराम बताता है, साथ ही मुसलमानों को ये भी बताता है की हिन्दुओ को उनके त्यौहार पर बधाई देना भी हराम है

सुन लीजिये खुद ही

फैज़ सयेद कह रहा है की दिवाली की बधाई देना हराम है, हिन्दुओ को उनके त्योहारों पर बधाई देना हराम है, क्यूंकि हम हिन्दुओ के धर्म को बिलकुल नहीं मानते, उनके त्यौहार हराम है और हराम को बधाई देना भी हराम है

फैज़ सयेद ये बात कहीं छिपकर नहीं कह रहा बल्कि खुलेआम कह रहा है, इसे भारत में कितना डर है ये भी इसकी बातों से आप समझ सकते है, जो खुलकर हिन्दुओ के त्योहारों को गालियाँ दे रहा है, आप इसे रमजान ईद इत्यादि की बधाई दीजिये, पर ये आपको दिवाली की बधाई नहीं देगा क्यूंकि इसके मुताबिक वो हराम है