ईद के दिन भारतीय मुस्लिम भीड़ ने मस्जिद से सेना पर बरसाए पत्थर, किया आतंकियों का समर्थन

ये गद्दारी और आतंक नहीं है तो फिर और क्या है, क्या इसके बारे में सच नहीं लिखा जाना चाहिए, या सेकुलरिज्म में अंधे होकर सबकुछ देखते हुए भी न देखने की एक्टिंग करनी चाहिए

पिछले दिनों श्रीनगर में जामिया मस्जिद पर भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान का झंडा लहराया और अब तो इसी मस्जिद से निकलकर सेना पर पत्थरबाजी कर दी

सेना पर पत्थरबाजी के अलावा आतंकियों के समर्थन में नारेबाजी की, बैनर और पोस्टर आतंकवादियों के समर्थन में लहराए, सबकुछ ईद की नमाज़ के बाद किया गया

श्रीनगर के जामिया मस्जिद में ईद की नमाज़ के लिए भीड़ जुटी थी, नमाज़ के बाद अचानक से आतंकियों के समर्थन में, इस्लामिक स्टेट के समर्थन में बैनर पोस्टर लेकर भारतीय मुस्लिम सड़कों पर आ गए

फिर आतंकियों के समर्थन में नारे भी लगाने लगे और फिर देखते ही देखते सेना पर पत्थरबाजी भी शुरू कर दी, भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान के समर्थन में भी नारे लगाये

ऐसे पोस्टर भी दिखाए जिसमे मूसा आर्मी लिखा हुआ था, जाकिर मूसा नाम के आतंकी का मस्जिद से निकलकर समर्थन किया गया

फिर ऐसे पोस्टर भी लहराए गए जिसपर मसूद अजहर की तस्वीर बनी थी, आतंकियों के और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाये गए, भारत की बर्बादी के नारे लगाये गए और सेना पर पत्थरबाजी भी की गयी, और वो भी ईद की नमाज़ पढने के बाद मस्जिद से निकलकर, दशको से चले आ रहे सेकुलरिज्म और तुष्टिकरण का ही ये परिणाम है, अन्यथा चीन में इस तरह की हरकत करने की हिमाकत कोई नहीं कर सकता